Sunday, July 1, 2007

"Orientation" memories

ये कविता मैने तब लिखी थी जब हम पहले पहल सिंगापुर आये थे और हमारे seniors ने orientation [read ragging] के समय ये assignment दिया था। This was my first attempt at writing poetry of any kind! It would be something very memorable for all my batchmates from Hwa Chong. Here's to Hwa Chong days and the ten of us!

जब दुनिया बढ़ रही थी नयी सदी की ओर,
हम SIA scholars नए नए आये थे सिंगापुर।
भारत के अलग अलग कोनों में रहते थे कभी,
मिलकर रहने, पढ़ने आये थे हम सभी।

एक-दूसरे से मिले हम orientation के दौरान,
जिससे हो गयी हमारी जान पहचान।
आइये अब इनसे हम आपको मिलवाएंगे,
हममें आप छेह लड़कों और चार लड़कियों को पाएंगे।

पहले मिलिये आलोक गुप्ता से,
जो आया है चंडीगढ़ से,
संत कबीर स्कूल से है वो आया,
पंजाबी गाना उसने बहुत अच्छा गाया।
ईश्वर से नाचने-गाने का उसने है पाया वरदान,
इससे बढ़ा हमारे साथियों में उसका सम्मान।
दूसरे देश में माँ के बिना पड़ गया वो बीमार,
तब जिसने उसकी मदद वही है उसका यार।

लड़कियों में पहले आयी मृणालिनी वाटसा,
मिनी पुकारो अगर नाम करना है छोटा सा।
आयी है बंगलोर से, गाती है बहुत अच्छा,
चुप-चुप सी रहती है, दिल है उसका सच्चा।
स्कूल था उसका बिशप काटन,
खाती नही वो कभी चिकन-मटन।
हिंदी आती है उसे समझ में कम,
सीखेगी हमसे रहकर संग हरदम।

अगला है मुकुंद भास्कर, जिसका घर है दिल्ली,
अनेक सफलताएं उसे कम्प्यूटर में हैं मिली।
सामाजिक ज्ञान में वो अव्वल है,
दिल्ली पब्लिक उसका स्कूल है।
भाग लिया था जिसमें उसने नाम था क्विज का BQC,
दांत दिखाए उसने तो आती है तुर्जो को हंसी।

आया है अक्षर, स्कूल था उसका जैपुरिया,
बुलाया जाता है उसको आती हैं जब एक्टिंग की घड़ियाँ।
रीवाइंद करता है जैसे सीन हो सच्चा,
गाना भी गा लेता है वो अच्छा।
टीटी खेलना शौक़ है, सुनता हिंदी गाना वो,
कर लेता है अक्षर "sometimes painting also"।

अब हैं मिस बैंगलोर, नाम है इनका युक्ति,
skating मास्टर हैं वो, ये कहना नही होगी अतिश्योक्ति।
किताबें जो वो हैं पढ़ती उनमें अब भी नही हुई है कमी,
ये बात अलग है कि उनकी आवाज़ बहुत है धीमी।
गाने-नाचने में कभी नही है वो हिचकती,
दिखने में भी बहुत अच्छी है वो लगती।
पापा आये हुए हैं, साथ में उसकी दीदी,
इसीलिये तो कभी उसे घर की याद नहीँ सताती।

केदार है महाराष्ट्र से, परंतु रहा है चौदह साल ऊटी में।
पढ़ा है केंद्रीय विद्यालय इन्दुनगर में, अव्वल है वो कम्प्यूटर में।
सब तरह के खेल खेलने की है उसे बीमारी, खाता है वो शुद्ध शाकाहारी।
जल्दी-जल्दी दोस्त बना लेता है, लंबे-लंबे भाषण भी दे लेता है।

आयी है लखनऊ से प्रियंका गुप्ता,
वहां उसका स्कूल था M.R. जैपुरिया।
दोस्तो को हिंदी सिखाती है,
साथ साथ कवितायेँ भी लिखती जाती है।
TV देखना है कमजोरी इसकी,
पढ़ती रहती ये हारर स्टोरी।
सिंह राशि में जन्म हुआ है,
कम्प्यूटर इंजीनियर बनना इसकी इच्छा है।

अगला है कदिर वेदाचलम,
जिसका घर है कलपक्कम।
गा लेता है अच्छा तमिल गाना,
उसे आता है कीबोर्ड भी बजाना।
हिंदी तो उसे बहुत कम है आती,
कर लेता है नक़ल, जैसे हो रजनीकांत की photocopy ।

अंत में था आया विजय चंद्रशेखर,
स्कूल था जिसका Saint Xavier गांधीनगर।
क्रिकेट, बैडमिन्टन का है वो अच्छा खिलाड़ी ,
कर ली है अब उसने सब बच्चों से यारी।

लक्ष्मी N.V. राव मैसूर से हैं आयी,
करती है वी हिंदी गानों की बहुत सुनाई।
घूमना फिरना है उसका बड़ा शौक़,
नाचने को कहो तो लगता है उसे खौफ।

इस प्रकार आपने हम सबका विवरण है पाया,
इसलिये कविता समाप्त करने का समय है आया।

3 comments:

रवि रतलामी said...

और, देखो ये कितनी बढ़िया कविता लिख डाली आपने.

Unknown said...

haha.. fundoops!

Unknown said...

nice attempt...:-)